उपराष्ट्रपति की अरुणाचल यात्रा:

भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अपनी आधिकारिक यात्रा के तहत अरुणाचल प्रदेश पहुंचे। उनके आगमन पर ईटानगर हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत किया गया। इस यात्रा का उद्देश्य राज्य के विकास कार्यों की समीक्षा करना, सांस्कृतिक और प्रशासनिक बैठकों में भाग लेना और स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित करना था।

ईटानगर में भव्य स्वागत

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के ईटानगर हवाई अड्डे पर पहुंचने पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल के.टी. परनाइक (सेवानिवृत्त) और मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने उनका स्वागत किया। इसके अलावा, राज्य के वरिष्ठ मंत्री, अधिकारी और गणमान्य व्यक्तियों ने भी उनका अभिनंदन किया।

स्थानीय पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से उनका स्वागत किया गया, जिससे अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।

यात्रा के मुख्य उद्देश्य

1. विकास कार्यों की समीक्षा

उपराष्ट्रपति ने राज्य में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं का जायजा लिया। इन परियोजनाओं में सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा सुधार और डिजिटल कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि राज्य के दूर-दराज़ इलाकों में विकास कार्यों को तेजी से लागू किया जाए।

2. शिक्षा और नवाचार पर जोर

अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख विश्वविद्यालयों और शिक्षा संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ उपराष्ट्रपति की महत्वपूर्ण बैठक हुई। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा ही प्रगति की कुंजी है। उन्होंने उच्च शिक्षा में तकनीकी नवाचारों और व्यावसायिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने की बात कही।

3. सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर को संरक्षित करने पर चर्चा

अरुणाचल प्रदेश अपनी अनूठी सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। उपराष्ट्रपति ने स्थानीय समुदायों और आदिवासी संगठनों के साथ संवाद किया और पारंपरिक कला, संगीत और रीति-रिवाजों के संरक्षण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इन सांस्कृतिक विरासतों को संरक्षित करने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए हरसंभव सहायता करेगी।

4. सीमा सुरक्षा और रणनीतिक महत्व

अरुणाचल प्रदेश भारत की पूर्वी सीमा पर स्थित एक महत्वपूर्ण राज्य है। चीन के साथ सीमा साझा करने के कारण इसकी भौगोलिक स्थिति सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उपराष्ट्रपति ने भारतीय सेना और आईटीबीपी के अधिकारियों से मुलाकात की और सुरक्षा उपायों की समीक्षा की। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया और जवानों की हौसला अफजाई की।

भाषण और संबोधन

ईटानगर में आयोजित एक भव्य समारोह में उपराष्ट्रपति ने प्रदेश के विकास और संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा:

“अरुणाचल प्रदेश न केवल भारत का अभिन्न अंग है, बल्कि इसकी संस्कृति, परंपराएँ और समर्पण राष्ट्र के गौरव का प्रतीक हैं। हमें यहाँ के विकास को प्राथमिकता देनी होगी और युवाओं को नए अवसर उपलब्ध कराने होंगे।”

उन्होंने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की और स्थानीय प्रशासन को सुझाव दिया कि वे केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य के सतत विकास के लिए नई योजनाएँ बनाएं।

स्थानीय समुदायों के साथ संवाद

उपराष्ट्रपति ने अपने प्रवास के दौरान विभिन्न आदिवासी समुदायों के प्रमुखों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों और सुझावों को केंद्र सरकार तक पहुँचाया जाएगा।

महत्वपूर्ण परियोजनाएँ और घोषणाएँ

  1. पर्यटन को बढ़ावा: अरुणाचल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता को देखते हुए पर्यटन क्षेत्र को और विकसित करने की योजनाएँ बनाई जा रही हैं। उपराष्ट्रपति ने राज्य में इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
  2. इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास: नई सड़कों, पुलों और रेलवे कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देने की घोषणा की गई।
  3. स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए विशेष योजनाएँ लागू करने की बात कही गई।
  4. डिजिटल इंडिया पहल: डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ाने और सरकारी योजनाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने पर बल दिया गया।

यात्रा का निष्कर्ष

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की अरुणाचल प्रदेश यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण रही। इस यात्रा ने न केवल राज्य की विकास योजनाओं को बल दिया, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय को भी मजबूत किया।

उनका संदेश स्पष्ट था – अरुणाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना और उसकी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना प्राथमिकता है। उनकी इस यात्रा से निश्चित रूप से राज्य के विकास को एक नई गति मिलेगी और राष्ट्रीय स्तर पर अरुणाचल प्रदेश की भूमिका को और सशक्त किया जाएगा।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here